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Showing posts from 2018

King Akbar's story

Akbar once put a question to his court that left everyone puzzled. As they all tried to figure out the answer, Birbal walked and asked what the matter was. And so they told him the question. ‘How many crows are there in the city?’ Birbal immediately smiled, went up to Akbar and announced that the answer to his questions was twenty-one thousand five hundred and twenty-three. When asked how he knew the answer, Birbal replied, ‘Ask your men to count the number of crows. If there are more, then the crows’ relatives from outside the city are visiting them. If there are fewer, then the crows are visiting their relatives outside the city.’ Pleased with the answer, Akbar presented Birbal with a ruby and pearl chain.

भानगढ़ क़िले की दूसरी सच्ची कहानी।

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दूसरी दास्तां : राजकुमारी रत्नावति और तांत्रिक सिंधु सेवड़ा की कहानी इस कहानी के अनुसार भानगढ़ की राजकुमारी रत्नावति बहुत रूपवति थी. उसके रूप की चर्चा पूरे भानगढ़ में थी और कई राजकुमार उससे विवाह करने के इच्छुक थे. उसी राज्य में सिंधु सेवड़ा नामक एक तांत्रिक रहता था. वह काले जादू में पारंगत था. राजकुमारी रत्नावति को देखकर वह उस पर आसक्त हो गया. वह किसी भी सूरत में राजकुमारी को हासिल करना चाहता था. एक दिन राजकुमारी रत्नावति की दासी बाज़ार में उनके लिए श्रृंगार का तेल लेने गई. तब तांत्रिक सिंधु सेवड़ा ने तांत्रिक शक्तियों से उस तेल पर वशीकरण मंत्र प्रयोग कर रत्नावति के पास भिजवाया. उसकी योजना थी कि वशीकरण के प्रभाव से राजकुमारी रत्नावति उसकी ओर खिंची चली आयेंगी. लेकिन राजकुमारी रत्नावति तांत्रिक का छल समझ गई और उसने वह तेल एक चट्टान पर गिरा दिया. तंत्र विद्या के प्रभाव में वह चट्टान तीव्र गति से तांत्रिक सिंधु सेवड़ा की ओर जाने लगी. जब तांत्रिक ने चट्टान से अपनी मौत निश्चित देखी, तो उसने श्राप दिया कि भानगढ़ बर्बाद हो जायेगा. वहाँ के निवासियों की शीघ्र मौत हो जायेगी और उनकी आत्माएं स...

भानगढ़ क़िला की सच्ची घटना

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भानगढ़ क़िला की सच्ची घटना राजस्थान के अल्वर जिले में भानगढ़ का किला (Bhangarh Fort) स्थित है. जयपुर और दिल्ली मार्ग के मध्य में स्थित यह किला ‘सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान’ (Sariska National Park) के एक छोर से लगा हुआ है. भानगढ़ का किला अपने बर्बाद होने के इतिहास और रहस्यमयी घटनाओं के कारण मशहूर है. यह भारत के सबसे डरावने स्थानों में गिना जाता है. यहाँ तक कि पुरातत्व विभाग द्वारा भी सूर्योदय और सूर्यास्त के उपरांत किले में प्रवेश न करने के संबंध में चेतावनी जारी की गई है भानगढ़ किले का इतिहास (Bhangarh Fort History In Hindi) भानगढ़ किले का निर्माण १५७३ में आमेर के महाराजा भगवंतदास ने करवाया था. उजाड़ होने के पूर्व यह किला लगभग ३०० वर्षों तक आबाद रहा रहा. महाराज भगवंतदास के कनिष्ठ पुत्र मानसिंह थे, जो मुग़ल बादशाह अकबर के नवरत्नों में सम्मिलित्त थे. उनके भाई माधो सिंह ने १६१३ में इस किले को अपनी रिहाईश बना लिया. उनके तीन पुत्र थे – सुजान सिंह, छत्र सिंह और तेज सिंह. माधोसिंह की मृत्यु के उपरांत भानगढ़ किले का अधिकार छत्र सिंह को मिला. छत्रसिंह का पुत्र अजबसिंह था. अजबसिंह ने भानगढ़ क...

गीदड़ की कूटनीति

मधुपुर नामक जंगल में एक शेर रहता था जिसके तीन मित्र थे, जो बड़े ही स्वार्थी थे। इनमें थे, गीदड़, भेड़िया और कौआ। इन तीनों ने शेर से इसलिए मित्रता की थी कि शेर जंगल का राजा था और उससे मित्रता होने से कोई शत्रु उनकी ओर आंख उठाकर भी नहीं देख सकता था। यही कारण था कि वे हर समय शेर की जी-हुजूरी और चापलूसी किया करते थे। एक बार-एक ऊंट अपने साथियों से बिछुड़कर इस जंगल में आ गया, इस घने जंगल में उसे बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिल रहा था। प्यास और भूख से बेहाल ऊंट का बुरा हाल हो रहा था। वह सोच रहा था कि कहां जाए, किधर जाएं, दूर-दूर तक उसे कोई अपना नजर नहीं आ रहा था।   इत्तफाक से उस ऊंट पर शेर के इन तीनों मित्रों की नजर पड़ गई। गीदड़ तो वैसे ही चालाकी और धूर्तता में अपना जवाब नहीं रखता, उसने इस अजनबी मोटे-ताजे ऊंट को जंगल में अकेला भटकते देखा तो उसके मुंह में पानी भर आया। उसने भेड़िये और कौए से कहा, ‘दोस्तों ! यदि शेर इस ऊंट को मार दे तो हम कई दिन तक आनन्द से बैठकर अपना पेट भर सकते हैं, कितने दिन आराम से कट जाएंगे, हमें कहीं भी शिकार की तलाश में नहीं भटकना पड़ेगा।’’ भेड़िये और क...

Panchtantra story. सियार और ढोल~The Jackal and the Drum

सियार और ढोल~The Jackal and the Drum एक बार एक जंगल के निकट दो राजाओं के बीच घोर युद्ध हुआ। एक जीता दूसरा हारा। सेनाएं अपने नगरों को लौट गई। बस ,  सेना का एक ढोल पीछे रह गया। उस ढोल को बजा-बजाकर सेना के साथ गए भांड व चारण रात को वीरता की कहानियां सुनाते थे। युद्ध के बाद एक दिन आंधी आई। आंधी के ज़ोर में वह ढोल लुढकता-पुढकता एक सूखे पेड के पास जाकर टिक गया। उस पेड की सूखी टहनियां ढोल से इस तरह से सट गई थी कि तेज हवा चलते ही ढोल पर टकरा जाती थी और ढमाढम ढमाढम की गुंजायमान आवाज़ होती। एक सियार उस क्षेत्र में घूमता था। उसने ढोल की आवाज़ सुनी। वह बडा भयभीत हुआ। ऐसी अजीब आवाज़ बोलते पहले उसने किसी जानवर को नहीं सुना था। वह सोचने लगा कि यह कैसा जानवर हैं ,  जो ऐसी जोरदार बोली बोलता हैं ’ढमाढम’। सियार छिपकर ढोल को देखता रहता ,  यह जानने के लिए कि यह जीव उडने वाला हैं या चार टांगो पर दौडने वाला। एक दिन सियार झाडी के पीछे छुप कर ढोल पर नजर रखे था। तभी पेड से नीचे उतरती हुई एक गिलहरी कूदकर ढोल पर उतरी। हलकी-सी ढम की आवाज़ भी हुई। गिलहरी ढोल पर बैठी दाना कुतरती रही...

Part 2 WELCOME TO DEAD HOUSE Goosebumps

                                         2 “Josh! Josh!” First I called Josh. Then I called Petey. But there was no sign of either of them. I ran down to the bottom of the driveway and peered into the car, but they weren’t there. Mom and Dad were still inside talking with Mr. Dawes. I looked along the street in both directions, but there was no sign of them. “Josh! Hey, Josh!” Finally, Mom and Dad came hurrying out the front door, looking alarmed. I guess they heard my shouts. “I can’t find Josh or Petey!” I yelled up to them from the street. “Maybe they’re around back,” Dad shouted down to me. I headed up the driveway, kicking away dead leaves as I ran. It was sunny down on the street, but as soon as I entered our yard, I was back in the shade, and it was immediately cool again. “Hey, Josh! Josh—where are you?” Why did I feel so scared? It was perfectly natural...

Part 1 ...WELCOME TO DEAD HOUSE Goosebumps - 01 R.L. Stine (An Undead Scan v1.5

1 Goosebumps Josh and I hated our new house. Sure, it was big. It looked like a mansion compared to our old house. It was a tall redbrick house with a sloping black roof and rows of windows framed by black shutters. It’s so dark, I thought, studying it from the street. The whole house was covered in darkness, as if it were hiding in the shadows of the gnarled, old trees that bent over it. It was the middle of July, but dead brown leaves blanketed the front yard. Our sneakers crunched over them as we trudged up the gravel driveway. Tall weeds poked up everywhere through the dead leaves. Thick clumps of weeds had completely overgrown an old flower bed beside the front porch. This house is creepy, I thought unhappily. Josh must have been thinking the same thing. Looking up at the old house, we both groaned loudly. Mr. Dawes, the friendly young man from the local real estate office, stopped near the front walk and turned around. “Everything okay?” he asked, staring...

पंचतंत्र की कहानियाँ

  सिंह को जीवित करने वाले किसी शहर में चार मित्र रहते थे। वे हमेशा एक साथ रहते थे। उनमें से तीन बहुत ज्ञानी थे। चौथा दोस्त इतना ज्ञानी नहीं था फिर भी वह दुनियादारी की बातें बहुत अच्छी तरह जानता था। एक दिन उन्होंने निश्चय किया कि वे दूर देश घूम-घूमकर देखेंगे और कुछ दौलत कमाकर लाएंगे। वे चारों एक साथ निकल पड़े। जल्दी ही वे एक घने जंगल में पहुँचे। रास्ते में उन्होंने किसी जानवर की हड्डियाँ ज़मीन पर खड़ी देखीं। एक ज्ञानी बोला, ‘‘हमें अपना ज्ञान परखने का मौका मिला है।’’ "ये हड्डियाँ किसी मरे हुए जानवर की हैं। मैं उसे फिर से जिन्दा कर दूँगा। मुझे पता है कि इन हड्डियों को कैसे जोड़ा जा सकता है।’’ दूसके मित्र ने कहा। ‘‘मैं इस जानवर पर माँस, खून और खाल चढ़ा दूँगा।’’  तीसरे मित्र ने कहा, ‘‘मैं अपने अमूल्य ज्ञान से इस जानवर को जिन्दा कर दूँगा।’’ अब तक पहले वाले ज्ञानी युवक ने उस जानवर की हड्डियाँ लगा दी थीं और दूसरे मित्र ने उस पर माँस, खून और खाल चढ़ा दी थी। चौथा युवक चिल्लाया, ‘‘अरे ! अरे ! उस जानवर में प्राण नहीं डालना यह एक सिंह है !’’ परन्तु ज्ञानी मित्रों ने उसकी बा...

2.कौआ और लोमड़ी

एक बार एक कौए को एक रोटी मिली। लोमड़ी ने सोचा क्यों न मैं इस कौए को मूर्ख बनाकर रोटी ले लूँ। लोमड़ी बोली - कौए भाई तुम इतना अच्छा गाते हो! मुझे भी एक गाना सुनाओ। कौए ने जैसे ही गाने के लिए मुँह खोला, रोटी नीचे गिर गई। लोमड़ी रोटी लेकर चली गई।

1.The ant and the Grasshopper

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The ant and the Grasshopper One summer’s day, in a field, a Grasshopper was hopping about, chirping and singing to its heart's content. An Ant passed by, bearing along with great effort an ear of corn he was taking to his nest. "Why don’t you come and chat with me," asked the Grasshopper, "instead of toiling your life away?" "I am helping to store up food for the winter," said the Ant, "and I recommend you to do the same." "Why bother about winter?" said the Grasshopper. "We have got plenty of food at present." But the Ant went on its way and continued its toil. When winter came, the Grasshopper found itself dying of hunger, while it saw the ants distributing, every day, corn and grain from the stores they had collected in summer. Then the Grasshopper knew... MORAL: WORK TODAY AND YOU CAN REAP THE BENEFITS TOMORROW!